
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9वें गुरु श्री तेग बहादुर जी की शहादत व बलिदान के लिए उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए राज्य सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सीएम योगी ने कहा गुरु श्री तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस हम सभी को प्रेरणा देताप्रधानमंत्री जी ने 26 दिसम्बर की तिथि को वीर बाल दिवस के रूप में समर्पित करते हुए चारों साहिबजादों के स्मृति को जीवंत बना दिया। औरंगजेब ने तिलक को मिटाने एवं जनेऊ को समाप्त करने के उद्देश्य से उसने देशभर में अत्याचार किये, कश्मीर में उसका अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गयागुरु तेग बहादुर जी महाराज ने औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई, यातनाओं के बावजूद अपने धर्म व संकल्प से नहीं डिगेहमारी गुरु परम्परा ने न केवल यातनाएं सही, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर यातना एवं क्रूरता का जवाब देने के लिए स्वयं को तैयार भी किया। गुरु गोबिंद सिंह महाराज शहीद पिता के पुत्र और शहीद पुत्रों के पिता, दुनिया में ऐसे उदाहरण बहुत कम भगवा ध्वज की रक्षा के लिए सिख गुरुओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने आप को बलिदान कियाबाबर के अत्याचार को देखकर गुरु नानक देव जी महाराज ने बाबर को जाबर कहकर उसके कृत्यों का दृढ़ता के साथ विरोध किया। श्रीराम जन्मभूमि के लिए हुए संघर्ष में सिख गुरु, योद्धा, निहंग, संतगण, राजा एवं सामान्य नागरिक स्वयं को बलिदान करने में पीछे नहीं हटे। हमारी अडिग आस्था अयोध्या में 500 वर्षों के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मन्दिर के निर्माण के महायज्ञ की साक्षी बनी। 350 वर्षां के बाद भी प्रत्येक सिख एवं सनातनी गुरु तेग बहादुर जी महाराज, भाई मतिदास, भाई सती दास तथा भाई दयाल दास के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर अपनी आस्था को व्यक्त कर रहा। लखनऊ को गुरु तेग बहादुर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त होना हमारा सौभाग्य है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज यहां डी0ए0वी0 डिग्री कॉलेज के प्रांगण में धन-धन श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर आयोजित ‘विशेष गुरुमति समागम’ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के समक्ष मत्था टेका। उन्होंने सिख गुरु परम्परा के 9वें गुरु श्री तेग बहादुर जी महाराज की शहादत व बलिदान के लिए उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए राज्य सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज हम 9वें सिख गुरु तेग बहादुर जी महाराज, भाई मतिदास, भाई सती दास एवं भाई दयाल की शहादत को स्मरण करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम उन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक अवसर है। आज का दिन हम सभी को प्रेरणा देता है। गुरु तेग बहादुर जी के समय औरंगजेब जैसा क्रूर बादशाह मनमानी कर रहा था। देश में धर्मान्तरण की एक मुहिम चला रहा था। तिलक को मिटाने एवं जनेऊ को समाप्त करने के उद्देश्य से उसने देशभर में अत्याचार किये। कश्मीर में उसका अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया था, वहां औरंगजेब का सिपहसालार शेर अफगान खान अत्याचार कर रहा था। पीड़ित कश्मीरी पंडित कृपाराम को कहीं शरण न मिलने पर उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के समक्ष याचना की। गुरु गोबिंद सिंह जी उस समय गुरु तेग बहादुर जी महाराज के साथ उपस्थित थे। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी महाराज तथा पण्डित कृपाराम की बातों को सुनकर धन-धन श्री गुरु से कहा कि आप कह रहे हैं कि किसी बड़े आदमी को अपना बलिदान देना पड़ेगा, आप से बड़ा कौन है। गुरु तेग बहादुर जी महाराज ने उस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्हें कैद कर लिया गया। भाई मतिदास को यातना देने के बाद आरी से चीरा गया। भाई सती दास को रुई में लपेटकर जला दिया गया। भाई दयाल दास को उबलते हुए पानी में डाल कर शहीद कर दिया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी महाराज तमाम यातनाओं के बावजूद अपने धर्म व संकल्प से नहीं डिगे। जब हम इतिहास के उन क्रूर क्षणों का स्मरण करते हैं, तब लगता है उस समय गुरु परम्परा ने न केवल यातनाएं सही, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर यातना एवं क्रूरता का जवाब देने के लिए स्वयं को तैयार भी किया। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने मात्र 09 वर्ष की उम्र में अपने गुरु एवं पिता को खोया। उनके चार साहिबजादे सनातन की रक्षा करने के लिए बलिदान हो गए। गुरु गोबिंद सिंह महाराज शहीद पिता के पुत्र और शहीद पुत्रों के पिता थे। दुनिया में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं।
सीएम ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज अयोध्या आए थे। उन्होंने एक भव्य समारोह में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत की सनातन परम्परा के भगवा ध्वज का आरोहण, मन्दिर के शिखर पर किया। यह वही भगवा ध्वज है, जिसकी रक्षा के लिए सिख गुरुओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने आप को बलिदान किया। सन् 1510 से लेकर सन् 1515 के बीच प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी महाराज अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में दर्शन के लिए आए। सन् 1528 में विदेशी आक्रांता बाबर के सिपहसालार के द्वारा मन्दिर को तोड़ दिया गया। उस समय बाबर के अत्याचार को देखकर गुरु नानक देव जी महाराज ने बाबर को जाबर कहकर उसके कृत्यों का दृढ़ता के साथ विरोध किया था। जब भी श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष हुए, सिख गुरु, योद्धा, निहंग, संतगण, राजा एवं सामान्य नागरिक स्वयं को बलिदान करने में पीछे नहीं हटे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के बारे में हम सभी को स्मरण रखना चाहिए कि कई साम्राज्य व पीढ़ियां आईं और गयीं, लेकिन आस्था अडिग रही। यही आस्था अयोध्या में 500 वर्षों के बाद पुनः श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर के निर्माण के महायज्ञ की साक्षी बनी है। वही आस्था गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर देखने को मिल रही है। 350 वर्षां के बाद भी प्रत्येक सिख एवं सनातनी गुरु तेग बहादुर जी महाराज, भाई मतिदास, भाई सती दास तथा भाई दयाल दास के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर अपनी आस्था को व्यक्त कर रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सत्य को कोई झुठला नहीं सकता। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों को जो सम्मान उस समय एवं उसके उपरान्त मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। वर्ष 2020 व 2021 में प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री आवास पर गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज के चार साहिबज़ादों की शहादत को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। प्रधानमंत्री जी ने 26 दिसम्बर की तिथि को वीर बाल दिवस के रूप में समर्पित करते हुए चारों साहिबजादों के स्मृति को जीवंत बना दिया। आने वाली पीढ़ी एवं नौजवानों को बताया गया कि जो देश एवं धर्म के लिए कुछ करेगा, उसके प्रति समाज कृतज्ञता ज्ञापित करेगा। गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस भी कृतज्ञता ज्ञापित करने का अवसर है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि लखनऊ को गुरु तेग बहादुर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ था। लखनऊ के याहियागंज गुरुद्वारा में गुरु तेग बहादुर जी महाराज का आगमन हुआ था। गुरु गोबिंद सिंह महाराज उस समय शिशु अवस्था में थे। उनकी स्मृति आज भी उसी रूप में याहियागंज गुरुद्वारा में देखने को मिलती है। यहां का तेज एवं अध्यात्म सिख परम्परा के गौरवशाली क्षणों में से एक है। उत्तर प्रदेश में स्थित इन स्मृतियों को मजबूती प्रदान करने में प्रदेश एवं भारत सरकार योगदान देने के लिए कृत संकल्पित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी की अपनी गुरु परम्परा, महापुरुषों और देश व धर्म के लिए अपना योगदान देने वाले योद्धाओं के प्रति आस्था अडिग होनी चाहिए। हमारी केसरिया पताका हमेशा अडिग रूप से सभी को प्रेरणा प्रदान करती है। यह आगे बढ़ने के लिए एक नई ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबन्ध कमेटी से जुड़े लोगों को आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। यह हमारे लिए केवल विचार नहीं, बल्कि उस महान परम्परा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का अवसर है, जिसने देश और धर्म के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर करने में कोई कोताही नहीं की। इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख, गुरुद्वारा प्रबन्ध समिति के पदाधिकारीगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



