शीतकालीन सत्र में रचा गया नया कीर्तिमान, एक बार भी स्थगित नहीं हुई विधानसभा कार्यवाही

पहली बार सर्वसहमति से पूरा गाया गया वंदे मातरम: सतीश महाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही एक बार भी स्थगित नहीं हुई। सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा हुई, जिसमें अधिकांश विधायकों ने सक्रिय सहभागिता की। आज़ादी के बाद पहली बार विधानसभा में सर्वसहमति से वंदे मातरम् गीत पूरा गाया गया, जिसे विधानसभा के इतिहास में एक स्मरणीय और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

शीतकालीन सत्र के समापन के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि अब सदन में प्रस्तुत होने वाले विधेयकों पर अधिक से अधिक सदस्यों को चर्चा का अवसर दिया जा रहा है। इस सत्र में भी विधेयकों में संशोधन के लिए अधिकांश विधायकों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सदस्यों से यह अपेक्षा की गई कि वे विषय पर केंद्रित रहकर चर्चा करें, जिससे अनावश्यक दोहराव से बचा जा सके।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि विधायकों से आग्रह किया गया है कि वे सदन में आने से पूर्व विधेयकों का गहन अध्ययन कर आएं। कई विधायकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार विधेयकों पर सार्थक चर्चा करने का अवसर प्राप्त हुआ है, जबकि पूर्व में उन्हें विधेयकों की पूरी जानकारी नहीं रहती थी।

विधेयकों की जानकारी के साथ ही मिलेगा बोलने का अवसर

श्री महाना ने कहा कि अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान विधायकों के साथ विभिन्न चरणों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। आगामी ‘संवाद कार्यक्रम’ में स्पष्ट रूप से कहा जाएगा कि अगले सत्र में विधायक विधेयकों को पूरी तरह पढ़कर ही सदन में आएं। अब केवल हाथ उठाने से बोलने का अवसर नहीं मिलेगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सदस्य विषय की सम्यक जानकारी के साथ चर्चा में भाग लें। उन्होंने कहा कि अगले सत्र में किसी भी समय विधायकों से विधेयक की मूल भावना और प्रमुख प्रावधानों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

मीडिया की भूमिका भी सराहनीय

अपने 35 वर्षों के संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अब विधायिका का सकारात्मक और रचनात्मक पक्ष सामने आ रहा है। इसमें मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पूर्व में विधायिका को लेकर नकारात्मक धारणाएं अधिक थीं, लेकिन वर्तमान में एक सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

विधानसभा भ्रमण से बढ़ रही जन-जागरूकता

श्री महाना ने बताया कि प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग विधानसभा भ्रमण के लिए आ रहे हैं। इससे आमजन को विधायिका की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिल रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनभागीदारी से विधायिका के प्रति जनविश्वास मजबूत हो रहा है।

24 घंटे 50 मिनट चला सदन, स्थगन समय शून्य

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधानसभा का वर्ष 2025 का तृतीय (शीतकालीन) सत्र 19 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक चार उपवेशनों में संपन्न हुआ। इस दौरान सदन की कार्यवाही कुल 24 घंटे 50 मिनट चली और एक बार भी स्थगित नहीं हुई। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान कुल 2776 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 95.46 प्रतिशत प्रश्न ऑनलाइन प्राप्त हुए। सभी प्रश्नोत्तर ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर सदस्यों और पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए।

महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित

शीतकालीन सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए, जिनमें—उत्तर प्रदेश पेंशन की हकदारी तथा विधि मान्यकरण विधेयक 2025उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम संशोधन) विधेयक 2025उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2025उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) विधेयक 2025उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक 2025उत्तर प्रदेश विनियोग (2025-26) का अनुपूरक विधेयक 2025सहित कुल 12 विधेयक शामिल हैं।

19 जनवरी से होगा अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन

श्री महाना ने जानकारी दी कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला करेंगे। सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन का समापन राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा किया जाएगा, जबकि 22 जनवरी को प्रतिनिधि अयोध्या दर्शन के लिए जाएंगे।

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