
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीपीसीटी परीक्षा के कारण किसी भी पात्र कर्मचारी को पदोन्नति के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के जिन कर्मचारियों को पदोन्नति की पात्रता है, उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए।
सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता उनके पदोन्नति के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीपीसीटी परीक्षा के कारण किसी भी तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाए। साथ ही, ऐसे कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने के बाद केवल सीपीसीटी परीक्षा की वजह से रिवर्ट करने की स्थिति भी नहीं बननी चाहिए।
जल्द लिया जाएगा सकारात्मक निर्णय
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता के संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्णय का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के महासचिव उमाशंकर तिवारी ने कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सीपीसीटी से मुक्त दिलाने के लिए हम मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करता है। साथ ही सरकार कर्मचारियों के हित में निर्णय ले रही है। उम्मीद है कि कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा।
बता दें सीपीसीटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के चलते कई कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को रोक दिया गया है। वहीं, कुछ जगह पदोन्नति आदेश को पहले जारी कर निरस्त कर दिया गया। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और पदोन्नति में बाधा बन रही सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता को हटाने और दो साल की परिवीक्षा अवधि पर पदोन्नति देने की मांग की थी।



