
दिल्ली में जमीन धंसने की बढ़ती घटनाओं के पीछे भूजल का अत्यधिक दोहन, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और बड़ी संख्या में निर्माण गतिविधियां प्रमुख कारण बनकर सामने आई हैं। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) और जल शक्ति मंत्रालय की राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में दिल्ली का भूजल दोहन स्तर 92.10 प्रतिशत पहुंच गया है। यह क्रिटिकल श्रेणी में माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सड़कों व जमीन के धसने की बड़ी वजह भूजल का अत्यधिक दोहन है। इससे धरती अंदर से खोखली होती जा रही है। आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी जरूरत को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहा है। इसका मिलाजुला असर दिल्लीवालों पर बेहद खराब पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के नई दिल्ली, उत्तर-पूर्व, शाहदरा और दक्षिण जिले ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में हैं।
मतलब इन जिलों में जितना पानी धरती के अंदर साल-दर-साल जा रहा है, Æउससे कहीं ज्यादा इसकी निकासी की जा रही है। जबकि पूर्वी और पश्चिम दिल्ली में भूजल दोहन क्रिटिकल श्रेणी यानि 90 फीसदी से है। केवल उत्तर-पश्चिम और नजूल भूमि अपेक्षाकृत सुरक्षित माने गए हैं।
धरती में यहां फंसता पानी
रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली की जमीन का बड़ा हिस्सा नरम एलुवियल मिट्टी से बना है। जबकि बीच में क्वार्टजाइट चट्टानें मौजूद हैं। भूजल मुख्य रूप से इन एलुवियल परतों और चट्टानों की दरारों में जमा रहता है। लेकिन लगातार निकासी के कारण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
2030 तक कई क्षेत्रों में भूजल स्तर और नीचे गिरेगा
सीजीडब्ल्यूए की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना फ्लड प्लेन और दिल्ली रिज राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण भूजल रिचार्ज जोन हैं। नेशनल एक्वीफर मैपिंग प्रोग्राम (नाक्विम) के तहत किए गए अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली की 27 तहसीलों में से 15 पहले ही ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। कई इलाकों में नाइट्रेट, फ्लोराइड, लवणता और भारी धातुओं से भूजल प्रदूषित भी पाया गया है। रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही, तो वर्ष 2030 तक कई क्षेत्रों में भूजल स्तर और नीचे जा सकता है। इसके लिए वर्षा जल संचयन, कृत्रिम भूजल रिचार्ज, भूजल निकासी पर सख्त नियंत्रण और रिचार्ज क्षेत्रों की सुरक्षा को आवश्यक बताया गया है।
दिल्ली में हर दिन लगभग 250 एमजीडी पानी की कमी
रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली में भूजल संकट एक जटिल समस्या है, जिसके समाधान के लिए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) मिलकर काम कर रहे हैं। जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर मिशन, डिजिटल फ्लो मीटर, टेलीमेट्री सिस्टम और जनभागीदारी कार्यक्रमों के जरिए जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, दिल्ली की आबादी भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2020 में जहां राजधानी की आबादी 2.01 करोड़ थी। वहीं, 2025 तक यह बढ़कर 2.21 करोड़ हो गई। बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग भी बढ़ रही है। डीजेबी प्रतिदिन करीब 1000 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है, जबकि शहर की जरूरत 1250 एमजीडी है। यानी दिल्ली को हर दिन लगभग 250 एमजीडी पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।



