
रूस के कामचटका प्रायद्वीप के दक्षिणी हिस्से में ओजर्नोव्स्की गांव के पास शुक्रवार तड़के 6.9 तीव्रता का भूकंप आया। ‘द जापान टाइम्स’ के मुताबिक, इसका असर जापान के हाकोदाते शहर में भी महसूस किया गया।
भूकंप के झटके महसूस होने के साथ ही जापान की मौसम एजेंसी ने शुरुआती चेतावनी जारी की, जिसमें गलती से भूकंप की तीव्रता 9.9 बता दी गई।
मौसम एजेंसी ने इस भूल को जल्दी ही सुधारते हुए चेतावनी को वापस ले लिया और बताया कि 9.9 नहीं, बल्कि 6.9 तीव्रता का भूकंप आया है।
अगर 9.9 तीव्रता का भूकंप आ जाए तो कितना विनाश?
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप की तीव्रता उस ‘फॉल्ट’ (पृथ्वी की परत में दरार या जोड़) के क्षेत्रफल से जुड़ी होती है जहां भूकंप आता है। फॉल्ट का क्षेत्रफल जितना बड़ा होगा, भूकंप उतना ही शक्तिशाली होगा।
हालांकि इस तरह के ‘मेगाथ्रस्ट’ भूकंप के बारे में कोई आधिकारिक डेटा जारी नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 9.9 तीव्रता वाले भूकंप में आज के 6.9 तीव्रता वाले भूकंप की तुलना में लगभग 32,000 गुना अधिक ऊर्जा निकलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कभी 9.9 तीव्रता का भूकंप आया तो 1960 के चिली और 2011 के तोहोकू भूकंपों की तुलना में भी कहीं अधिक शक्तिशाली होगा।
इतिहास के सबसे भयानक भूकंप
जापान की मौसम एजेंसी ने भूकंप के झटकों को लेकर जो शुरुआती जानकारी दी थी, अगर वो सच होती तो यह मानव इतिहास का सबसे शक्तिशाली भूकंप होता।
1960 में चिली में आया भूकंप
अब तक का सबसे भयानक भूकंप 1960 में चिली में आया था, जिसके बाद स्थिति काफी भयावह हो गई थी। चिली में 1960 में 9.5 तीव्रता का भूकंप आया था। इसे ‘वाल्डिविया भूकंप’ भी कहा जाता है। इसमें 1,655 लोगों की जान गई और 20 लाख लोग बेघर हो गए।
1964 का ग्रेट अलास्का भूकंप
ग्रेट अलास्का में 1964 में 9.2 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप के झटके करीब पांच मिनट तक महसूस किए गए। इस भूकंप में 131 लोगों की मौत हुई।
2004 में सुमात्रा भूकंप
2004 में सुमात्रा भूकंप ने हिंद महासागर में सुनामी ला दी थी, जिसमें 2.5 लाख से अधिक लोग मारे गए। यह भूकंप 9.1 तीव्रता का आया था।
2011 में तोहोकू भूकंप
2011 में तोहोकू भूकंप 9.1 तीव्रता का आया था। इसके कारण फुकुशिमा परमाणु आपदा हुई और एक भीषण सुनामी आई, जिसमें 1,800 से अधिक लोगों की जान चली गई।



