अगरतला, असम में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में प्रदर्शन, यहां जानें विरोध के कारण

नागरिकता कानून से पहले एनआरसी का भी भरपूर विरोध किया गया था।


 देश के अलग-अलग हिस्सों में नागरिकता संशोधन बिल का विरोध हो रहा है। त्रिपुरा के अगरतला में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया है। आज लोकसभा में दोपहर 12 बजे गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को पेश करेंगे।विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह विधेयक मुसलमानों के खिलाफ है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन कर रहा है। असम में इस बिल के विरोध में सोमवार को 16 संगठनों ने 12 घंटे का बंद बुलाया है। इनके अलावा आदिवासी छात्रों ने भी इस बंद का समर्थन किया है, असम के अलावा अन्य राज्यों में भी बिल के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। नागरिकता कानून से पहले एनआरसी का भी भरपूर विरोध किया गया था।

बेंगलुरु IIM की सांसदों को चिट्ठी
संसद में नागरिकता संशोधन बिल आने से पहले बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के टीचर, छात्र और कर्मचारियों ने सांसदों के नाम एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में सांसदों से अपील की गई है कि वो इस बिल का विरोध करें। इसके लिए आने वाली पीढ़ियां उन्हें सलाम करेंगी। इसमें कहा गया है कि नागरिकता संशोधन बिल हमारे मूल अधिकार के खिलाफ है, जो हमें संविधान से मिले हैं।

CPI (M) करेगी दो बड़ी मांग
सीपीआई (एम) की ओर से नागरिकता कानून में दो बदलाव करने की मांग की गई है, इसमें चिन्हित देशों की जगह सभी पड़ोसी देशों का नाम जोड़ने की बात कही है। इसके अलावा भारत सभी नागरिकों के लिए है और वसुधैव कुटुम्बकम की नीति पर चलने की मांग की गई है।

कांग्रेस नेता पी. चिदम्बरम ने बिल का विरोध यह कहकर कियाहै कि एक धर्मनिरपेक्ष देश किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव कैसे कर सकता है? यह निर्णय मोहम्मद अली जिन्ना की सोच की जीत हुई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बिल का पहले से ही विरोध कर रही है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी इस विधेयक का ज़ोर-शोर से विरोध लगातार बढ़ रहा है क्योंकि ये राज्य बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब है।

इन राज्यों में इस बात का विरोध हो रहा है कि यहां कथित तौर पर पड़ोसी राज्य बांग्लादेश से मुसलमान और हिंदू दोनों ही बड़ी संख्या में आकर बसे हैं। आरोप ये भी है कि मौजूदा सरकार हिंदू मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के प्रयास में प्रवासी हिंदुओं के लिए भारत की नागरिकता लेकर यहां बसना आसान बनाना चाहती है। केन्द्र सरकार पर यह भी आरोप है कि सरकार इस विधेयक के बहाने एनआरसी लिस्ट से बाहर हुए अवैध हिंदुओं को वापस भारतीय नागरिकता पाने में सहायता करना चाहती है।


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