...वरिष्ठता क्रम के पांच चिकित्सकों को दरकिनार कर कार्यवाहक निदेशक बने डा. राजीव लोचन अपने सेवा विस्तार में जुटे   

...वरिष्ठता क्रम के पांच चिकित्सकों को दरकिनार कर कार्यवाहक निदेशक बने डा. राजीव लोचन अपने सेवा विस्तार में जुटे   


अश्वनी के.रंजन
लखनऊ। ...बीते दो वर्षों से अपने से 5 वरिष्ठ चिकित्सकों को अपने दमखम पर बलरामपुर अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखाकर खुद को कार्यवाहक निदेशक के रूप में तैनाती दिलाकर काबिज रहना सच में कोई साधारण बात नहीं बल्कि नामुमकिन सी बात है। लेकिन यह कारनामा हुआ है वह भी राजधानी के नामी गिरामी बलरामपुर अस्पताल में जी हां सरकार की नाक के नीचे और विभागीय मुख्यालय स्वास्थ्य भवन से चंद कदमों की दूरी पर स्थित इस अस्पताल में जब से कार्यवाहक निदेशक के रूप में डा.राजीव लोचन की तैनाती हुई तब से आये दिन किसी न किसी तुगलकी फरमान या राजशाही जैसे  अस्पताल प्रशासन के निर्णयों को लेकर मीडिया में चर्चा में बना रहता है और नामुमकिन बात मुमकिन  कैसे हुई यह  तो  मुमकिन कराने वाला या करने वाला  सरकार या शासन ही जाने लेकिन आज की तारीख में इसका खामियाजा भुगतने को इस अस्पताल के मरीज उनके परिजन और अस्पताल के डाक्टर अधिकारी और कर्मचारीगण सभी झेलने को जरूर मजबूर हैं।     
जहां कभी प्रदेश भर के आम-जनमानस और मरीजों की अपने बेहतर स्वास्थ्य की आशाएं इस अस्पताल से बंधी रहती थीं वहीं अब अस्पताल के कर्मचारी की पत्नी तक को इलाज मुहैया कराने से भी इनकार करने में जरा सा भी संकोच नहीं कर पाया जिससे उसकी मौत हो गयी इससे बदतर स्थिति और  क्या  हो सकती है। 
बताते चलें कि जिस समय बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डा.राजीव लोचन ने अपना कार्यभार संभाला था उस समय चिकित्सालय में इनसे वरिष्ठता क्रम में एक या दो नहीं बल्कि पांच वरिष्ठ चिकित्सक तैनात थे, जिनमें लेवल 6 में डा.ई.यू.सिददीकी लेवल 5 में डा.एम.के.गुप्ता डा.अतुल मिश्रा डा.ए.के.श्रीवास्तव और डा.सुरभि माथुर शामिल थे। जिनमें से डा.ए.के.श्रीवास्तव बीते मई माह में और डा.ई.यू.सिददीकी बीते जून माह में सेवानिवत्त हो चुके हैं। डा.एम.के.गुप्ता और डा.अतुल मिश्रा लेवल 6 में आ चुके हैं तथा डा.सुरभि माथुर अपर निदेशक कार्मिक के रूप में निदेशालय में तैनात हैं। वरिष्ठता क्रम में काफी उपर रहे उपरोक्त इन सभी चिकित्सकों को अपने रसूख और उंची पहुंच के चलते अस्पताल के बाहर तैनाती दिलवाकर खुद निदेशक की कुर्सी पर काबिज डा.राजीव लोचन की हस्ती का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। 
बेहद ताज्जुब की बात है कि यहां के कर्मचारियों और स्टाफ की मानें तो निदेशक के पद पर काबिज होने के पहले इसी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन के रूप में कार्यरत डा. राजीव लोचन हालांकि पहले बेहद कम बोलने और रिजर्व व्यवहार वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे, लेकिन निदेशक की कुर्सी पाने के बाद तो इनका रवैया मरीजों और कर्मचारियों के प्रति गैरजिम्मेदाराना और इतना उग्र हो चला कि जैसे बादशाहत मिल गयी हो। अब इन सबके बाद भी कार्यवाहक निदेशक अपना  कार्यकाल विस्तार करवाने के लिए एक बार पुन दमखम लगाने में जी जान से जुटे हैं, लेकिन देखना है कि प्रदेश सरकार मरीजों और कर्मचारी हितों को प्राथमिकता देती है या फिर अपनी गलती दोहराकर एक तानाशाह को पुन नियम विरूद्ध अपने विशेषाधिकार का गलत इस्तेमाल कर एक अघोषित तानाशाह कार्यवाहक निदेशक डा.राजीव लोचन को उनके आगे नतमस्तक होकर बलरामपुर अस्पताल की कमान उनके हाथ में सौंपती है।  


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