प्रदेश में कार्यरत विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर न करने व पदों का पुनर्गठन न होने से लाख

दोनों मांगो में कोई वित्तीय भार नही।’

प्रदेश में कार्यरत विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर न करने व पदों का पुनर्गठन न होने से लाख

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उप्र के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि 8 अक्टूबर 2018 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में परिषद के साथ सम्पन्न हुई बैठक में  वेतन विसंगति व कैडर पुनर्गठन के सम्बंध में सहमति बनी थी कि वित्त विभाग द्वारा एक माह में सभी औपचारिकता पूर्ण कर मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद शासनादेश निर्गत किये जायेंगे जिसमें वित्त विभाग भी उपस्थित था।
  श्री मिश्रा ने बताया कि फार्मासिस्ट लैब टेक्नीशियन आप्टोमेट्रिस्ट प्रयोगशाला सहायक बेसिक हेल्थ वर्कर गन्ना पर्यवेक्षक ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अधिकारी वन दरोगा वन रक्षक ट्यूबवेल टेक्नीशियन नलकूप चालक सींच पाल सींच पर्यवेक्षक राजस्व अधिकारी चकबंदी लेखपाल रोडवेज के विभिन्न संवर्ग अधीनस्थ कृषि सेवा के कर्मचारी एक्स रे टेक्नीशियन डेन्टल हाइजिनिस्ट राजस्व लेखपाल आदि संवर्ग की वेतन विसंगति के संबंध में राज्य वेतन समिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को 2 वर्ष पूर्व प्रस्तुत की जा चुकी है परंतु अभी तक उस पर निर्णय कर शासनादेश निर्गत ना किए जाने से कर्मचारियों का मनोबल कमजोर हो रहा है ।
 बेसिक हेल्थ वर्कर की विसंगीति 23 की स्थिति तो यह है कि जुलाई 1981 को सभी यूनीपरपज वर्कर को मल्टीपरपज वर्कर बना दिया गया पदनाम व कार्य की समानता एक कर दी गई परंतु वेतन 2011 से पूर्व की कार्मिकों को 2800 ग्रेड पे उसके बाद के कार्मिको को ग्रेड पे 2000 दिया जा रहा हैए एक ही पद के 2 वेतनमान एवं 2 पदों का एक वेतनमान है अतः स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष व महिला की उक्त वेतन विसंगति दूर किये जाने पर सबकी सहमति है। 
 पदों का सृजन सहित सभी संवर्गों के पदों के पुनर्गठन न होने के कारण
विभिन्न संवर्गों के उच्च पदों पर पदोन्नतियां नहीं हो पा रही है मूल पद रिक्त पड़े हुए हैं जिन पर नियुक्तियां ना होने से जनता को उचित स्वास्थ्य परिवहन ग्राम विकास ग्राम पंचायत समाज कल्याण कृषि वन सिंचाई आदि विभागों के कर्मचारियों को सुविधाएं देने में परेशानियां हो रही हैं। विभागों में पुनर्गठन ना होने से उच्च पदों का सृजन नहीं हो रहा है। विभागों में मानक के आधार पर पद सृजित नहीं है अनेक पद मानक के अनुरूप नहीं हैं। जो पद सृजित हैं उन पर भी नियुक्तियाँ नहीं हो रही है। पदों पर स्थाई नियुक्तियों की जगह संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य को लिया जाना जनहित में नहीं है। संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का भी भविष्य अंधकार मय है।
 आज शासन में बैठे अधिकारियों द्वारा यह बताया जा रहा है कि वित्त विभाग आर्थिक स्थिति बहुत सुदृढ़ न होने के कारण निर्णय में विलम्ब हो रहा है जबकि परिषद द्वारा अवगत कराया जा चुका है कि उपरोक्त दोनों मांगो में कोई वित्तीय भार नही पड़ना है जिन संवर्गो में विसंगति व्याप्त है उनमें कर्मचारी उच्च वेतन पा रहे हैं परन्तु अधिकारियों द्वारा भ्रमित कर समस्याओं के समाधान में रूचि नहीं ली जा रही। अब कर्मचारियों के सब्र की सीमा समाप्त हो रही है इसलिए प्रदेश में कार्यरत सभी कर्मचारी परिषद द्वारा घोषित आंदोलन में सहभागिता करते हुए 21 नवंबर को सभी जिलों में मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।


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