सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की पेरवी कर रहे हैं वकील को मिली धमकी

आपको बताते जाए कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की रोजाना सुनवाई के सीधा प्रसारण और रिकॉर्डिग की मांग वाली याचिका पर 16 सितंबर को सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की पेरवी कर रहे हैं वकील को मिली धमकी

सुप्रीम कोर्ट  की देश के प्रधान न्यायाधीश  रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ में अयोध्या भूमि विवाद में रोजाना सुनवाई हो रही है। आज सुनवाई का 22वां दिन है। सुनवाई प्रारंभ हो गई है।मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन अपनी दलीलें रख रहे हैं। जिरह प्रारंभ होने से पहले धवन ने उन्हें फेसबुक पर मिली धमकी का सुप्रीम कोर्ट में जिक्र किया। इसपर शीर्ष अदालत ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें सुरक्षा की आवयकता है? तब धवन ने इससे इनकार कर दिया।

आपको बताते जाए कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की रोजाना सुनवाई के सीधा प्रसारण और रिकॉर्डिग की मांग वाली याचिका पर 16 सितंबर को सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मामले में पूर्व भाजपा नेता और आरएसएस विचारक के.एन. गोविंदाचार्य की याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगी।

आपको बताते जाए कि बुधवार को सुनवाई के दौरान वकील राजीव धवन मुस्लिम पक्ष रखते हुए कहा कि संविधान पीठ को दो मुख्य बिन्दुओं पर ही विचार करना है। पहला विवादित स्थल पर मालिकाना हक किसका है और दूसरा क्या गलत परम्परा को जारी रखा जा सकता है।

राजीव धवन ने सन 1962 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि जो गलती हुई उसे जारी नहीं रखा जा सकता, यही कानून के तहत होना चाहिए।

धवन ने बताया कि अदालत में यह साबित किए जाने कि कोशिश की जाती रही है कि जमीन पहले हिन्दू पक्षकारों के अधिकार में थी। यह मानकर अदालत को विश्वास दिलाया जाता रहा है जो उचित नहीं है। उन्होंने हिंदू पक्ष के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'क्या रामलला विराजमान कह सकते हैं कि उस जमीन पर मालिकाना हक उनका है? नहीं, उनका मालिकाना हक कभी नहीं रहा है।

राजीव धवन ने कहा निर्मोही अखाड़ा ने जो गैरकानूनी कब्जा चबूतरे पर किया उस पर मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद से इसकी न्यायिक समीक्षा शुरू हुई। एक नोटिस जो कि निर्मोही अखाड़े के गलत दावे पर आधारित था उसके चलते आज 2019 में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। राजीव धवन ने निर्मोही अखाड़े के मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि सेवादार के अलावा अन्य संबधित चीजों पर उनका दावा नहीं हो सकता है क्योंकि वे उनके मालिक नही हैं, वे सिर्फ सेवादार हैं. ट्रस्टियों और सेवादार में अंतर है।


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