CM भूपेश बघेल ने खेला 'आरक्षण' का सियासी स्ट्रोक, कानूनी पेंच फंसने की आशंका

आरक्षण के नए प्रावधानों का छत्तीसगढ़ लोक सेवा संशोधन अध्यादेश 2019 का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया है।


छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने आरक्षण के जरिए सियासी मास्टर स्ट्रोक मार दिया है, इससे राज्य के सियासी गणित को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने और पुख्ता करने का प्रयास किया है। आरक्षण का आंकड़ा 82 फीसदी तक पहुंच गया है, इसके लिए अध्यादेश भी जारी कर दिया गया है, मगर कानूनी पेंच फंसने की आशंकाओं को नकारा नहीं जा रहा है। भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रदेश में आरक्षण का दायरा बढ़ाने का ऐलान किया था। घोषणा के 20 दिन बाद राज्य सरकार ने विधिवत आरक्षण बढ़ाए जाने का अध्यादेश भी जारी कर दिया गया है। इस अध्यादेश के जरिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 82 फीसदी हो गया है।

आरक्षण के नए प्रावधानों का छत्तीसगढ़ लोक सेवा संशोधन अध्यादेश 2019 का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के जरिए अब राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) का आरक्षण 12 से बढ़कर 13 और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण 14 से बढ़कर 27 प्रतिशत हो गया है।

अनुसूचित जनजाति वर्ग (एसटी) के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वह पूर्व की तरह 32 प्रतिशत ही रहेगा। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण भी राज्य में प्रभावी हो गया है।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण का लाभ एसटी, एससी और ओबीसी को नहीं मिलेगा। इस तरह राज्य में अब आरक्षण का प्रतिशत 82 प्रतिशत हो गया है।राज्य में जनसंख्या के अनुपात को देखा जाए तो एसटी 32 प्रतिशत, एससी 12 प्रतिशत और ओबीसी की आबादी 45 प्रतिशत है। आबादी के हिसाब से इन तीनों वर्गो की हिस्सेदारी 89 प्रतिशत है। इसी आबादी के गणित को देखकर यह आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। राजनीतिक विश्लेषक रुद्र अवस्थी का कहना है कि आरक्षण का विरोध कोई नहीं करेगा, मगर इसे संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए। जहां तक राज्य में नई आरक्षण व्यवस्था को लागू किए जाने का सवाल है, इससे भूपेश बघेल और कांग्रेस को निसंदेह लाभ होगा।

यह फैसला राजनीतिक तौर पर कांग्रेस को दूरगामी लाभ देने वाला साबित हो सकता है। कानून विशेषज्ञ राकेश झा ने बताया कि सरकार के इस फैसले को न्यायालय में आसानी से चुनौती दी जा सकेगी, संविधान 50 प्रतिशत से ज्यादा का आरक्षण दिए जाने की अनुमति नहीं देता है। जिन राज्यों ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया, वहां 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण की सीमा पर न्यायालय ने रोक लगा दी। छत्तीसगढ़ सरकार ने आरक्षण बढ़ाने का प्रावधान लाने के लिए जनसंख्या को आधार बनाया है, जिसे चुनौती देना आसान होगा।"
संविधान के जानकारों के अनुसार, देश में तामिलनाडु और महाराष्ट्र ही दो ऐसे राज्य हैं जहां आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा है और न्यायालय ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। तामिलनाडु में 69 प्रतिशत और महाराष्ट्र में आरक्षण का प्रतिशत 64 है। यह इसलिए अमल में आ गया क्योंकि तामिलनाडु में आरक्षण को लेकर पारित विधेयक को संसद ने संविधान के शेड्यूल नौ में लाकर दिया गया। संविधान में प्रावधान है कि जो भी विधेयक शेड्यूल नौ में जाता है उसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, वहीं महाराष्ट्र में मराठा वर्ग को आरक्षण देने से पहले सरकार ने 43 हजार से ज्यादा मराठा परिवारों का सर्वे कराया था।
 


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