PM मोदी बोले- सैन्य समझौतों से कहीं गहरी है भारत और रूस की दोस्ती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के दो दिवसीय दौरे के तहत व्लादिवोस्तोक पहुंच चुके हैं. व्लादिवोस्तोक पहुंचने पर नरेंद्र मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.

PM मोदी बोले- सैन्य समझौतों से कहीं गहरी है भारत और रूस की दोस्ती

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के दो दिवसीय दौरे के तहत व्लादिवोस्तोक पहुंच चुके हैं. व्लादिवोस्तोक पहुंचने पर नरेंद्र मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पांचवें ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) की बैठक में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया है. EEF बैठक के अलावा मोदी और पुतिन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत भी होगी.  

रूसी न्यूज एजेंसी तास से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि EEF सिर्फ मुद्दों पर चर्चा करने के लिए ही नहीं है. हम इस फोरम की तैयारी 6 महीनों से कर रहे थे. इसके लिए रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों से एक बड़ा प्रतिनिधि दल हमसे मिलने आया था. हमारे राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार के मंत्री और व्यवसायी ने रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों का दौरा किया. अब मैं जा रहा हूं. मुझे पूरा भरोसा है कि इस दौरे से भारत और रूस दोनों देशों की बीच नई ऊर्जा आएगी और हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और रूस का संबंध अब सैन्य और तकनीकी सहयोग से बहुत आगे निकल चुकी है. हम बेहद करीबी दोस्त हैं. और करीबी दोस्त होने के नाते हम यह सोचते हैं कि भविष्य में एकदूसरे की बेहतरी के लिए क्या-क्या कर सकते हैं. भारत और रूस के बीच सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान में नए रिश्ते बन रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और रूस मिलकर गगनयान मिशन पर काम करेंगे. गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें तीन भारतीय अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएंगे. रूस इस मिशन के लिए हमारे अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष में जाने, रहने और काम करने का प्रशिक्षण देगा. यह बताता है कि हमारा रिश्ता कितना प्रगाढ़ है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि हमने हाल ही में रूस के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भारत बुलाया था. भारत और रूस के स्टूडेंट्स एकसाथ मिलकर विभिन्न प्रकार के नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मैं आश्चर्यचकित थे कि कैसे सिर्फ 36 घंटे में ही दोनों देशों के छात्रों ने कुछ हैरतअंगेज प्रयोग किए. हम दोनों देश सिर्फ सैन्य तकनीकी के खरीदार और विक्रेता बनकर नहीं रहना चाहते. मैं ये बात कई बार कह चुका हूं कि दोनों देश एक नए और मजबूत रिश्ते की ओर बढ़ रहे हैं. आज के दौर में भारत में किसी भी तकनीकी का हस्तांतरण और सैन्य उत्पादन कम कीमत में हो सकता है. और हम ऐसी तकनीकों और हथियारों को बनाकर कम कीमत पर दूसरे देशों को दे सकते हैं. भारत और रूस को इस मौके का लाभ मिलकर उठाना होगा.


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