...आखिरी घंटे तक अपने सेवा विस्तार के लिए परिक्रमा करते रहे बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डा.राजीव लोचन 

 ...आखिरी घंटे तक अपने सेवा विस्तार के लिए परिक्रमा करते रहे बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डा.राजीव लोचन 

अश्वनी के.रंजन
लखनउ। राजधानी के मिनी मेडिकल कालेज के कार्यवाहक निदेशक डा.राजीव लोचन का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है और बीते दो दिन पूर्व स्वास्थ्य विभाग से जारी सेवानिव्र्रत्त चिकित्सकों की सूची में तीसरे नम्बर पर उल्लिखित डा.लोचन ने अब तक विभागीय निर्देशानुसार अपने वरिष्ठतम अधिकारी को कार्यभार नहीं सौंपा है। बल्कि वह आज अवकाश के दिन भी जनपथ स्थित सचिवालय के फेरे बडे सवेरे से ही लगाकर डेरा डाले हुए हैं। हालांकि उनकी पहुंच को तो कतई कम नहीं आंका जा सकता क्योंकि कोई साधारण चिकित्सक अपने 5-6 वरिष्ठों को दरकिनार कर पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति न होने देना और कार्यवाहक निदेशक के रूप में खुद को लगभग 2 वर्ष से अधिक समय तक जमाये रखना, कर्मचारियोें चिकित्सकों सहित मरीजों एवं तीमारदारों के प्रति लापरवाही एवं तानाशाही रवैया अख्तियार करना अस्पताल को अपनी जागीर समझना, अस्पताल के चिकित्सकों से शहीदों के लिए राहत के नाम पर ली गयी धनराशि को लम्बे अरसे तक अपने अधीन रखना और पेड पौधों के लिए चिकित्सकों से सीधे तीन-तीन हजार रूपये वसूलने के बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना, ये सभी बाते सिद्ध करती हैं कि सरकार और शासन में या तो डा.लोचन की पकड बहुत काफी गहरी है या फिर सांठगांठ, और शायद इसी कारण ही बीते काफी समय से अपने सेवा विस्तार के प्रति आश्वस्त डा.लोचन दो दिन पूर्व जारी विभागीय सेवानिव्रत्त चिकित्सकों की सूची में तीसरे पायदान पर अपने नाम होने के बावजूद आज देर शाम तक किसी भी हालत में अपने वरिष्ठतम अधिकारी को पदभार देने को तैयार नहीं हैं। जबकि नियमत आज ही रात्रि 12 बजे के पूर्व उनको अपना पदभार दे देना होगा यदि उनके विस्तार संबंधी कोई शासनादेश जारी न हो। हालांकि देर शाम तक ऐसी कोई सूचना शासन की ओर से जारी नहीं हो सकी है कि उन्हें सेवा विस्तार दिया जा रहा है। लेकिन डा.लोचन अपनी जिद पर अडे हैं और शासन में निरन्तर परिक्रमा जारी है। अब उनके सेवाकाल का समय अंतत चंद घंटे ही शेष बचा है। अब देखना है बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक के रूप में सबसे अधिकतम खराब कार्यकाल की इबारत लिखने वाले डा लोचन को सरकार और शासन से कोई हनुमान रूपी संकटमोचक उनको सेवा विस्तार की संजीवनी दिला पाने में सफल हो पाता है या फिर उन्हें अब सरकार और शासन बलरामपुर अस्पताल की और दुर्गति करने की इजाजत पर यहीं पर विराम लगाकर उनको सेवानिवत्ति प्रदान करता है। 

हालांकि उपरोक्त मामले में सरकार या शासन पूरी तरह से स्वतंत्र है जो चाहे निर्णय ले लेकिन अगर डा.राजीव लोचन को सेवा विस्तार प्रदान किया जाता है तो निश्चित तौर पर न केवल अस्पताल के कर्मचारियों अधिकारियों मरीजो और तीमारदारों बल्कि आम जनमानस में भी उनके हितों को दरकिनार करने वाले को सरकार और शासन पर संरक्षण देने का आरोप लगना तय है। अब इस तरह के असमंजस की स्थिति को छंटने में मात्र चंद घंटे ही शेष है, देखना है कि सबका साथ और सबका विकास का नारा देने वाली सरकार अपने आम जन मानस की भावनाओं को कितना समझती और उस पर अमल करती है या फिर खाली कोरी बयानबाजी।


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