राज्यसभा उपसभापति का चुनाव 9 अगस्त को

राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। 9 अगस्त को होनेवाले चुनाव में सरकार व विपक्ष ने आम सहमति के बजाए चुनाव में जाने का फैसला किया है। सत्तापक्ष की तरफ से जदयू के हरिवंश के उम्मीदवार बनने की संभावना है।

राज्यसभा उपसभापति का चुनाव 9 अगस्त को

नई दिल्ली: राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। 9 अगस्त को होनेवाले चुनाव में सरकार व विपक्ष ने आम सहमति के बजाए चुनाव में जाने का फैसला किया है। सत्तापक्ष की तरफ से जदयू के हरिवंश के उम्मीदवार बनने की संभावना है। विपक्षी खेमें में द्रमुक के तिरुचि शिवा व राकांपा की वंदना चव्हाण के नाम की चर्चा है। संसद के मानसून सत्र के पहले ही तत्कालीन उपसभापति पी.जे. कुरियन का कार्यकाल समाप्त हो गया था। सभापति वेंकैया नायडू ने मौजूदा सत्र में ही उपसभापति के लिए चुनाव कराने का फैसला किया है। 8 अगस्त को नामांकन दाखिल किए जाएंगे और 9 अगस्त को चुनाव होगा। सरकार व विपक्ष की तैयारियों को देखते हुए आम सहमति से उपसभापति के चुनाव की संभावनाएं खत्म हो गई हैं और दोनों खेमों ने इसे वर्चस्व की जंग के रूप में लिया है। संसद के उच्च सदन में सरकार अल्पमत में है। सत्तारूढ एनडीए के पास 92 सांसद हैं। उसे चार निर्दलीय भी समर्थन करेंगे, जिससे उसका आंकड़ा 96 तक पहुंच जाता है। यह आंकड़ा उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त नहीं है। 245 सदस्यीय सदन में एक स्थान रिक्त है। ऐसे में जीत के लिए 123 सांसदों का समर्थन चाहिए। भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा है कि उसे कांग्रेस विरोधी दलों अन्नाद्रमुक, बीजेडी, टीआरएस व वाईएसआर कांग्रेस का समर्थन मिल सकता है, जिनके 30 सांसद हैं। इस तरह उनकी संख्या 126 तक पहुंच जाती है जो जीत के लिए पर्याप्त है।


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