प्रदेश में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की नयी पहल

मन-कक्ष, दुआ से दवा और वि़द्यालय कार्यक्रम नये कदम

प्रदेश में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की नयी पहल

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम उप्र के तहत प्रदेश में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का संचालन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 में प्रदेश के 45 जनपद क्रमशः कानपुर नगर, सीतापुर, फैजाबाद, रायबरेली, बांदा, इटावा, उन्नाव, बाराबंकी, हरदोई, सुलतानपुर, फतेहपुर, बहराइच, मिर्जापुर, मुरादाबाद, आगरा, मथुरा, बरेली, बस्ती, महोबा, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर, झांसी, वाराणसी, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, जौनपुर, देवरियाॅ, गोरखपुर, गोण्डा, अम्बेडकर नगर, बलरामपुर, अमेठी, बदायूॅ, लखीमपुर-खीरी, लखनऊ, एवं शाॅहजहाॅपुर में संचालित है।
इस बारे मेें राज्य मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा सुनील पाण्डेय ने बताया कि भारत सरकार के अनुमोदनोपरान्त वर्तमान वित्तीय में समस्त उप्र को कार्यक्रम के अन्तर्गत आच्छादित किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाना प्रक्रियाधीन है। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्र्तगत की जाने वाली गतिविधियाँ में सेवाओं का प्राविधान मानसिक विकारों का प्रबन्धन एवं जनपद के विभिन्न स्तर के स्वास्थ्य इकाईयों यथा-जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्दªों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्दªों पर चिकित्सकीय परामर्श काउंसलिंग एवं उपचार की सेवाएं प्रदान करना। क्षमता विकास मानसिक विकारों से बचाव हेतु प्रारम्भ में ही चिन्हीकरण एवं प्रबन्धन हेतु मानव संसाधन को प्रशिक्षण करना एवं जिला चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्साधिकारियों द्वारा सामुदायिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाना। 

इस बारे में राज्य मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य सलाहकार सूर्य प्रकाश पाठक बताते हैं कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत चिकित्साधिकारियों, नर्स, डीएचईओ, एचईओ अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों, आशा एवं एएनएम आदि को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। जनजागरूकता के माध्यम से प्रारम्भ में ही मानसिक विकारों की पहचान हेतु प्रचार-प्रसार (पोस्टर-बैनर आदि द्वारा) करना जिससे कि समुदाय में मानसिक रोगों के प्रति फैली भ्रान्तियों को दूर किया जा सके। अरबन स्लम क्षेत्रों, विद्यालय महाविद्यालय विश्वविद्यालयों एवं कार्यक्षेत्रों में शिविर के माध्यम से जागरूकता हेतु आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के अन्तर्गत जनपद काउंसलिंग केन्दª के माध्यम से समस्त रोगों में आवश्यकतानुसार काउंसलिंग दिये जाने का प्राविधान है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ, उ0प्र0 के नये कदम मन-कक्ष: प्रत्येक जनपद में एक डिस्ट्रीक्ट काउंसलिंग सेंटर की स्थापना किये जाने का प्राविधान किया गया है, जिसमें जनपद स्तरीय 4 से 5 काउंसलर, साईकोलाजिस्ट एक साथ बैठेगें, जिसे मन-कक्ष कहाॅ जायेगा। अर्थात मन के रोगों का उपचार यहाॅ सम्भव है। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत कार्यरत् मनोरोग विशेषज्ञ एवं क्लीनीकल साईकोलाॅजिस्ट की देख रेख में इसका कार्यान्वयन किया जायेगा।
दुआ से दवा: प्रत्येक जनपद में ऐसे केन्दªों का चिन्ह्किरण किया जायेगा, जहाॅ लोग झाड़-फूक से मानसिक रोगों का उपचार करवाने आते है। ऐसे स्थानों यथा मजार इत्यादि के प्रभारी की सहमति से वहाॅ शिविर लगा कर ऐसे रोगियों को उपचार उपलब्ध कराया जायेगा। वि़द्यालय कार्यक्रम: प्रत्येक जनपद में कार्यरत् क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट को एक विद्यालय का चयन करना होगा, जहाॅ मनोविज्ञान विभाग हो और वहाॅ के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मनोरोग विद्या में प्रशिक्षित करना होगा, जिससे वह ऐसे रोगियों की पहॅचान कर सकने में समर्थ हो सकें। मानसिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र: प्रत्येक जनपद में मंदबुद्धि व्यक्तियों को प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने हेतु शिविर का आयोजन कराये जाने का प्राविधान है, जिससे ऐसे व्यक्तियों को सरकार द्वारा प्रदान किये जा रहे अन्य लाभ प्राप्त हो सकें। नशा, आत्महत्या के प्रयास करना, अवसाद आदि मानसिक स्थितियों का उपचार मात्र काउंसलिंग से भी सम्भव है, आवश्यकता है सही समय पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना।     


 


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