केन्द्र और एसजीपीजीआई के बराबर नर्सों को दिये जायें भत्ते : अशोक कुमार  

नर्सों के बिना जनमानस को कैसे मिलें बेहतर चिकित्सा सेवाएं 

केन्द्र और एसजीपीजीआई के बराबर नर्सों को दिये जायें भत्ते : अशोक कुमार  

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार नित नये आदेश और सुविधाएं दिये जाने के लिए प्रयासरत है। लेकिन चिकित्सा सेवाओं की रीढ की हडडी माने जाने वाले पैरामेडिकल स्टाफ की तरफ से सरकार बेखबर नजर आती है । प्रदेश की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों को बेहतर सुविधाओं के लिए वर्तमान में मानक से काफी कम पद स्वीकत है, बल्कि प्रदेश में नर्सों के कुल स्वीकत पद 7770 के सापेक्ष 3500 से भी कम पद भरे हैं। यहां तक कि इमर्जेंसी सेवाओं के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा खोले गये अधिकतर टामा सेंटरों में भी नर्सों के काफी पद खाली पडे हैं। इन परिस्थितियो में प्रदेश सरकार किस प्रकार से आम जनमानस को बेहतर चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदान किये जाने का दावा कर रही है इसका जवाब तो वह ही दे सकती है। इस बारे में बीते दो दशको ंसे अधिक समय से राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार बताते हैं कि मानक के अनुसार तीन बेड पर एक नर्स एक पाली के लिए निर्धारित है। लेकिन प्रदेश में तो स्थिति काफी बद से बदतर है और जब दशकों पहले के स्वीकत पदों पर ही आधे से अधिक खाली पडे है तो फिर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर कैसे रहेगी। इसके लिए सरकार को जल्द से जल्द कदम उठाने होंगे और बेहद कम संसाधनों और सुविधाओं के बीच अपनी क्षमता से कई गुना अधिक काम करने वाली नर्सों के हित में उनकी मांगों की ओर भी ध्यान देना होगा ताकि आने वाले समय में राजकीय नर्सेज संघ को हडताल जैसा आन्दोलन का कोई निर्णय न लेना पडे। वर्तमान में हमारी प्रमुख मांगों में केन्द्र, एसजीपीजीआई,आरएमएल आईएमएस के बराबर भत्ते दिये जाने और महानिदेशालय में स्वीकत पदों पर भर्ती किया जाना है।         
 


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