...दिनों दिन बलरामपुर अस्पताल के बिगडते हालात...   

...और कार्यवाहक निदेशक को अपनी सेवा विस्तार का इंतजार

...दिनों दिन बलरामपुर अस्पताल के बिगडते हालात...   


 
अश्वनी के.रजन
लखनउ। प्रदेश के प्रांतीय चिकित्सा सेवा के सबसे बडे बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डा.राजीव लोचन पर एक बार फिर से वित्तीय अनियमितता के  तहत इस बार सीधे-सीधे  अवैध तरीके से  पेड  लगाने के नाम पर अस्पताल के चिकित्सकों से प्रति चिकित्सक तीन हजार रूपये वसूले जाने का गंभीर आरोप लगा है। जबकि प्रदेश सरकार ने इस बार वहद व्रक्षारोपण के लिए करोडों पौधे निशुल्क उपलब्ध कराने के लिए युद्ध स्तर पर इंतजाम किये थे। इस बेहद गंभीर मामले की शासन में सीधे शिकायत की गयी है। इससे पूर्व कार्यवाहक निदेशक पर पुलवामा अटैक के शहीदों के लिए अस्पताल के चिकित्सक एवं कर्मचारियों के वेतन से कटौती की रकम कई महीनों तक मुख्यमंत्री राहत कोष में न देकर अपने अधीन रखने पर आपत्ति होने पर उसे जमा कराया गया था।
उपरोक्त के अलावा भी कार्यवाहक निदेशक आये दिन अपने तानाशाही रवैये और बेतुके फरमानों के कारण न केवल मरीज और तीमारदारों बल्कि अस्पताल के    सभी वर्ग के कर्मचारियों के लिए भी मुसीबत बने रहते हैं। कभी तो परिसर स्थित कर्मचारी आवास में जबरन दरवाजा खुलवाकर उनकी बिजली कटाने पहुंच जाते  हैं तो कभी अस्पताल बिना अपने आला अधिकारियों या शासन के अनुमति के परिसर मे स्थित तीमारदारों की सुविधा के लिए बने रैनबसेरे को जमींदोज कराा देते हैं।  ये किस्से तो कार्यवाहक निदेशक महोदय की तानाशाही कार्यशैली के चंद नमूने भर है इससे दीगर अस्पताल परिसर  और उसके बजट को  अपनी  निजी मालकियत समझकर मनमानी के उनके अनगिनत मामले  हैं। जिनमें अपने पसंदीदा फर्म  या  कम्पनी  को बिना  किसी टेंडर या निविदा के  सीधे तौर पर काम दे देना या  फिर खरीददारी कर  लेना तो जैसे इनके बायें  हाथ का खेल है।  शासन  और विभागीय  मुखिया  तथा आला अधिकारियों को दरकिनार कर मनमाने फैसले लेने के बावजूद बीते लम्बे अरसे से इन पर कोई कार्रवाई  या जांच नहीं होना इनकी सरकार और शासन में इनकी गहरी पैठ या फिर गठजोड को साबित करता है। यही कारण है कि इनसे पीडित अस्पताल का कोई भी अधिकारी चिकित्सक या कर्मचारी इनके खिलाफ बोलने से कतराता है।  
हालांकि अब उपरोक्त कार्यवाहक निदेशक का कार्यकाल मात्र तीन दिन ही शेष है लेकिन महोदय न केवल अपने कार्यकाल विस्तार के लिए बीते काफी समय से एडी से चोटी का जोर लगाने में जुटे हैं बल्कि अपने चाटुकारों और मक्खनबाजों को पूरी तरह से आश्वस्त भी करते रहते हैं कि उनका कार्यकाल निश्चित तौर पर बढना तय है। लेकिन अब देखना यह है कि बलरामपुर अस्पताल से पूर्णकालिक निदेशक को दरकिनार कर बीते दो वर्षों से कार्यवाहक निदेशक के रूप में डा.राजीव लोचन को जिम्मा देने के बाद उनके द्वारा निरंतर सरकार की मंशा के विपरीत वित्तीय अनियमितता के आरोपी अपने तानाशाही रवैये से मरीज तीमारदारों और चिकित्सकों तथा कर्मचारियों को परेशान करने समय-समय पर अपने अधिकारों की धौस दिखाकर बिना किसी उपयुक्त प्रयोजन के  धन वसूली किये जाने मनमाने तरीके से मनचाही फर्मों को काम दिये जाने आदि के गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार पीएमएस संघ के सेवानिव्रत्ति आयु के बढाये जाने  के कडे विरोध के बाद भी सारी विषम परिस्थितियों को दरकिनार कर शासन कार्यवाहक निदेशक महोदय को सेवाविस्तार देती है या समस्त मामलों के मददेनजर  समय पर सेवानिव्रत्ति देकर बलरामपुर अस्पताल को पुन प्रगति करने के मार्ग को प्रशस्त करता है।           


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